By Swami Vivekananda

By Swami Vivekananda स्वामी जी ने बताये इंसान की हार के 4 अदृश्य कारण

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By Swami Vivekananda स्वामी जी ने बताये इंसान की हार के 4 अदृश्य कारण

By Swami Vivekananda For Big Defeat

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दोस्तों ये आर्टिकल स्वामी जी By Swami Vivekananda द्वारा बताए गए ऐसे चार कारणों पर होने वाला है, जो जाने अनजाने में पता ही नहीं चलता कि हम कोई गलती कर भी रहे हैं. ये 4 गलतियां,ऐसे चार कारण हैं जो इंसान की हार की सबसे बड़ी वजह बनती है. दोस्तों इस आर्टिकल को पूरा पढ़ना और अच्छा लगे तो कमेंट जरूर करना।
आपको ऐसी चार गलती के बारे में पता चलने वाला है जिनकी शायद आपको भनक भी ना लगे कि आप कोई गलती कर रहे हो. इन चार गलतियों को ध्यान से समझना। पहली गलती जो शायद इंसान को पता भी नहीं चलती और वह गलती है:-
1. खुद का विश्वास दूसरों में ढूंढना (Find yourself in others)
दोस्तों, अक्सर आपने ऐसे लोगों को देखा होगा जो दूसरों पर आश्रित होते हैं. दूसरे लोगों द्वारा उठाये गए कदम के बाद ही अपना कदम उठाएंगे।क्योकि उन्हें खुद पर इतना भरोसा ही नहीं होता कि वो भी कुछ कर सकते हैं.
दोस्तों स्वामी जी कहते हैं, “ईश्वर ने हर एक को खास बनाया है और कुदरत की शरारत देखो इंसान के भीतर बड़ी शक्ति होते हुए भी दिखाई नहीं देती और दिखाई दे भी तो कैसे? कभी देखने की कोशिश ही नहीं की.”
दूसरी सबसे बड़ी गलती:-
2. 3. खुद की कमी को दूर करने के बजाय अपने जैसे लोग ढूंढना (Finding people like you instead of removing yourself)
दोस्तों आपने ऐसा सहयोग तो काफी लोगों में देखा होगा जो अपनी गंदी आदतें सुधारने के बजाय अपने जैसे लोगों की तलाश में ही रहते हैं.
स्वामी जी कहते हैं, “बुरी आदतें हमेशा दोस्त जल्दी बना लेती है.” बुरे लोगों को बहुत बुरे लोग जल्द मिल जाते हैं. आफत तो अच्छे लोगों को ढूंढने में होती है. परंतु ऐसे लोग बड़ी कामयाबी का सपना कभी नहीं सजा सकते।तीसरी गलती:-
3. संकल्प में भी ईगो (Ego also in resolution)
बहुत लोग संकल्प करते हैं, कल से कुछ नया करूंगा, जीवन में कुछ करने की शुरुआत करूंगा, बड़ा बन कर ही दिखाऊंगा,अब तो चाहे जो हो जाए कुछ करके ही दिखाऊंगा और इन सब संकल्पों को बड़े गर्व के साथ और आपसी लोगों तक पहुंचाने में कोई कमी नहीं छोडते। ऐसे लोगों को पता ही नहीं चलता कि उन्होंने संकल्प के साथ (Ego) ईगो पाल रखा है. ईगो का क्या नतीजा होता है, ये आप अच्छी तरह से जानते हैं.
दोस्तों स्वामी जी कहते हैं, “जिन संकल्पों में घमंड झलकता हो ऐसे संकल्प कभी पूरे नहीं होते।” अगर दोस्त आप भी इस अंजनी बीमारी का शिकार हैं, तो आप आज से ही सुधार ले. जीवन में संकल्प जरूर करें परन्तु ईगो को त्याग करें और अपने संकल्प का कभी किसी से जिक्र ना करें।चौथी और आखरी गलती:-
4. सोचना परन्तु शुरु ना करना (Think but don’t start)
इस गलती का तो पक्का काफी लोग शिकार होंगे। ये गलती हर केटेगरी का इंसान करता है. दोस्तों स्वामी जी कहते हैं, “सोचना एक बीज है और शुरू करना एक वृक्ष” अब आपको निर्णय करना है कि बीज को बीज ही रहने देना है या इसे वृक्ष बनाना है.
दोस्तों ये थी चार अदृश्य गलतियाँ जिन्हें बहुत काम लोग पहचानते है। जो इन गलतियों को सुधरने का काम करते है उनकी जीत निश्चित होती है।

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