Life Status in Hindi काश! शब्द ही जीवन को बर्बाद करता हैं

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Life Status in Hindi काश! शब्द ही जीवन को बर्बाद करता हैं  

Life Status i Hindi
Life Status i Hindi

Life Status in Hindi जब इंसान के पास सपने तो बहुत होते हैं, परंतु वो उन्हें समय रहते  पूरा नहीं कर पाता है. तब यह काश! शब्द का जाप शुरू हो जाता है। यह जाप हमेशा पश्चाताप का ही सूचक है। पर इसका कोई लाभ नहीं होता, क्योंकि समय बीतने के बाद इंसान इसकी आड़ में अपनी नाकामयाबी को छुपाता है। और अपनी योग्यता का प्रदर्शन करता है. ये काश शब्द मुख्य तौर पर पांच प्रकार से समझा जा सकता है।

1. समय को समय रहते नहीं पहचाना

जब इंसान अपनी जवानी में दीवानगी का मजा ले रहा होता है, तब कुछ करने का समय होता है। पर वह समय तो भविष्य बनाने के असफल प्रयास में गवा दिया. जब समय की पहचान करनी थी, तब इसे यूं ही मजाक में लेना लोगों की मूर्खता ही है।

2. स्वयं की चाहते है

काश! शब्द को देखा जाए तो ऐसे लोग ज्यादा Use करते हैं, जो स्वयं को इस जीवन से क्या चाहिए और इस जीवन में क्या कमाना चाहते हैं, इस बारे में कुछ नहीं सोचते. ये बड़ी दुर्भाग्यपूर्ण बात है. और पूरे जीवन भर किसी और के सपनों को पूरा करने में अपनी जी जान लगा देते हैं. जब कुछ चंग लालच से सपने पूरे नहीं होते. तब यह याद आती है “अब पछतावत होत क्या जब चिड़िया चुग गई खेत”

3. खुद को मौका ना देना

जब खुद को मौका देने की बात आती है, तब देखना ऐसे लोग खुद को अपने अभिमान स्वरूप शब्दों में यही कहेंगे कुछ नहीं है, मैं सब जानता हूं। खुद को कुछ सिखाना बहुत जरूरी कदम है. पर ये नहीं उठाना चाहते. जिससे कभी खुद का विकास नहीं हो पाता।

4. विशेष परिस्थितियों का लाभ न उठाना

हर इंसान के पास अच्छी – बुरी दोनों ही परिस्थितियां रहती है. पर जब उन्हें ये कहा जाए कि इन परिस्थितियों में अगर तुम कुछ कर लेते हो, तो भविष्य में मार्ग सुदृढ़ हो जाएंगे. तुम्हारी आज की मेहनत कल प्रतिफल जरूर देगी. किंतु जिन्हें कुछ करना ही नहीं होता, वही लोग इस शब्द की शोभा बढ़ाते हैं. उन्हें ना विपरीत परिस्थितियों से और ना ही अनुकूल स्थिति से कोई फर्क पड़ता हैं.

5 पश्चाताप का गर्व

अब जब खुद के पास कुछ बचा ही नहीं है. तभी इन शब्दों का जाप करने का समय आ जाता है. अपने पश्चात को बड़े गर्व से दूसरों के सम्मुख प्रस्तुत करते हैं. अरे मुझे समय ही नहीं मिला अगर समय मिलता तो मैं आज कहां से कहां पहुंच जाता. मैं अपना जीवन प्रतिष्ठित बना चुका होता. ऐसे शब्दों से पश्चाताप और गर्व दोनों ही छलकते हैं।

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