Joint Family me kaise rahe

Joint Family me Kaise Rahe | Family Love | 3 पारिवारीक सुझाव

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Joint Family me Kaise Rahe | Family Love | 3 पारिवारीक सुझाव

दोस्तो, व्यक्ति के संपूर्ण जीवन काल में परिवार का खासा महत्व रहता है। ऐसे में परिवार के मुखिया को चाहिए कि वह अपने परिवार के भरण पोषण के साथ-साथ परिवार की खुशियों का भी ध्यान रखें। जिससे परिवार की गाड़ी बिना किसी अड़चन के चल सके। मुख्य सदस्य को इस गाड़ी को चलाने के लिए कुछ तीन बातों का हमेशा ध्यान रखना चाहिए | आइए जानते हैं परिवार को खुश रखने के कुछ मंत्र, ताकि परिवार में प्यार (Family Love) बढ़ता ही रहें>>> आइए पढ़ते हैं Joint Family me kaise Rahe (जॉइंटफैमिली में कैसे रहें>>>>

Joint Family me Kaise Rahe
Joint Family me Kaise Rahe

1. परिवार में एकता का भाव (sense of unity in the family)

परिवार हमेशा एकता के भाव से ही चलता है। इस रथ में चाहे जितने भी घोड़े जुते हुए हो, वे सभी एक ही दिशा में बढ़ते हुए होने चाहिए। इन घोड़ों की लगाम परिवार के मुख्य सदस्य के हाथ में ही होनी चाहिए। मुखिया अपने परिवार में हर सदस्य का बारीकी से ध्यान रखें, ताकि कभी किसी को कोई तकलीफ ना हो। जिससे परिवार की एकता को भी किसी भी कारण से कोई खतरा नहीं हो। परिवार में एकता का होना स्वर्ग से कम होता | परिवार का हर सदस्य खुद को मुखिया के हाथों सौप कर खुश हैं, उस परिवार में कभी एकता अखंडता को लेकर कभी कोई मुसबित जन्म नहीं ले सकती |

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2. परिवार में पारदर्शिता (Transparency in the family)

हर घर-परिवार के कुछ राज होते हैं। वो राज घर के सभी जिम्मेदार वह बड़े लोगों को पता होने चाहिए, ताकि कभी भी किसी भी सदस्य को यह ना लगे कि कोई राज की बात छुपाई जा रही है। इसका भ्रम पैदा ना हो जैसे-जैसे परिवार उन्नति करता है। उसका प्रतिफल पूरे परिवार को मिलना चाहिए। घर के राज और प्रतिष्ठा पर हर सदस्य जाने जरुर पर बखाने नहीं | तभी कह सकते है की परिवार में पारदर्शिता होनी चाहिय | 

Family Love

3. परिवार की आजीविका (Family livelihood)

हर घर-परिवार में आजीविका के साधन एक या एक से अधिक हो सकते हैं। जो भी परिवार की आजीविका के नाम पर धन-रुपए आते हैं, वह हमेशा किसी एक के या मुखिया के हाथ में ही होना चाहिए। आजकल छोटे परिवार काफी हैं। जिनमें एक लड़का एक लड़की पति व पत्नी कुल मिलाकर 4 सदस्यों का परिवार है। ऐसे में पति-पत्नी ही सारे अधिकारी होते हैं। बात जब बड़े परिवार की हो जिसमें पिताजी के सभी चार बेटे एक साथ रहते हो ऐसे में मुखिया को ही सब देखना चाहिए। परिवार में हर सदस्य की जरूरत फिजूल खर्ची ना हो ये देखने का जिम्मा सिर्फ मुखिया का ही होता हैं | छोटे व बड़े सभी की छोटी जरूरत पूरी करना परिवार के हर सदस्य का फर्ज हैं |

 

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